जौनपुर का रहने वाला 35 वर्षीय युवक 15 मार्च को सउदी अरब से लौटा था. लखनऊ एयरपोर्ट पर हुई जांच पर वह नार्मल मिला था. लिहाजा घर आने के बाद वह सामान्य रूप से ही लोगो से मिलता-जुलता रहा. चार दिन बाद उसे सर्दी-खांसी शुरू हुई. जगह का बदलाव समझकर उसने दवा ली लेकिन तबियत में कोई सुधार नहीं हुआ. इसके बाद वह खुद 21 मार्च को जिला अस्पताल पहुंचा. यहां उसका सैंपल लेकर बीएचयू में जांच कराई गई तो रिपोर्ट कोरोना पाजिटिव आई.
पूर्वांचल में कोरोना से पीड़ित मरीज के सामने आने का यह दूसरा मामला है. इससे पहले 18 मार्च काके दुबई से वाराणसी पहुंचा युवक भी कोरोना संक्रमित पाया जा चुका है.
इसी तरह 24 मार्च की सुबह शामली का एक और मरीज भी कोरोना पीड़ित पाये जाने से हड़कंप मच गया है. स्वास्थ्य विभाग के एक बड़े अधिकारी बताते हैं “होली के बाद बड़ी संख्या में लोग सउदी अरब से यूपी में आए हैं. शुरुआती जांच में इनमें कोई लक्षण तो नहीं दिखे थे लेकिन समय बीतने के साथ अब ये कोरोना मरीज के रूप में चिन्हित हुए हैं. खास बात यह है कि ये मरीज शहरों के नहीं बल्कि दूरदराज के कस्बों से हैं और कोरोना के लक्षण प्रकट होने से पहले ये कई लोगो के संपर्क में आ चुके हैं.”
इन सब वजहों से कल तक यूपी सरकार हालांकि 17 जिलों में लॉकडाउन घोषित कर चुकी थी लेकिन इसके बावजूद दूसरे जिलों में कोरोना पीड़ित मरीजों के सामने आने से सरकार को अपनी रणनीति बदलनी पड़ी. 24 मार्च को सभी जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्णय लिया कि सूबे के सभी 75 जिलों में लॉकडाउन घोषित किया जाए. लॉक डाउन की यह अवधि फिलहाल 27 मार्च तक की है. लेकिन मुख्यमंत्री योगी ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर हालातन नहीं सुधरे तो जरूरत पड़ने पर कर्फ्यू भी लगाई जा सकती है.
असल में, सरकार के लिए चिंता का विषय वे लोग भी हैं जो पिछले तीन दिनों में प्रदेश के अलग-अलग जिलों में ट्रेनों से पहुंचे हैं. इनमें ज्यादातर वे लोग हैं जो दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र जैसे जिलों से आए हैं जहां कोरोना का प्रकोप सबसे अधिक है. इन लोगों की किसी भी तरह की कोई जांच नहीं की गई है.
गोंडा, बहराइच, बस्ती, अयोध्या, भदोही, मिर्जापुर, कुशीनगर, श्रावस्ती, लखीमपुर, पीलीभीत, बलिया, गाजीपुर जैसे जिलों में पिछले तीन दिनों में बड़ी संख्या में लोग कोरोना पीड़ित जिलों से आए हैं. स्वास्थ्य विभाग और गृह विभाग ने इन जिलों के जिलाधिकारियों से ऐसे लोगों की पहचान करने को कहा है जहां कोरोना पीड़ित जिलों से लोग आए हैं.
गृह विभाग के एक अधिकारी बताते हैं “चूंकि कोरोना पीड़ितों को लक्षण काफी देर में प्रकट हो रहे हैं और इससे पहले ये लोग कई लोगों के संपर्क में आ रहे हैं. ऐसे में सभी की पहचान एक साथ करा पाना संभव नहीं है.”
हालांकि प्रदेश की सभी सीमाएं सील कर दी गई हैं लेकिन सबसे बड़ी चिंता यूपी की सीमा में प्रवेश कर चुके ऐसे लोगों को चिन्हित करने की है जिनमें भविष्य में कोरोना के लक्षण प्रकट हो सकते हैं. ऐसी चुनौतियों से निबटने के लिए ही यूपी सरकार ने 27 तारीख तक प्रदेश के सभी जिलों को एक साथ लॉकडाउन करने का फैसला किया है.
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